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*श्रीनिताई चाँद*
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*ठाकुर श्रीवृन्दावनदास*
*वेदव्यासो य एवासीदासो वृन्दावनोऽधुना।।*
(गौ० ग० १०६)
ये पूर्वलीला में श्रीवेदव्यास थे। श्रीकृष्णचैतन्यदेव के लीला प्रधान प्रसिद्ध ग्रन्थ श्रीचैतन्यभागवत के आप रचयिता हैं। इनके पिता का नाम श्रीवैकुण्ठनाथ मिश्र था और माता का नाम श्रीमती नारायणीदेवी, जो श्रीवास पण्डित के बड़े भाई श्रीनलिन पण्डित की कन्या थी। इनका जन्म १४२६ शकाब्द वैशाख कृष्ण द्वादशी के दिन कुमारहट्ट ग्राम में हुआ था।
१४५७ शकाब्द में इन्होंने श्रीचैतन्यभागवत की रचना की पहले इस ग्रन्थ रत्न का नाम चैतन्यमंगल रखा गया था, बाद में श्रीचैतन्य भागवत नाम से प्रसिद्ध हुआ। इन्होंने देनुड़ ग्राम में श्रीगौर-निताई के श्रीविग्रहों की प्रतिष्ठा की और फिर अपने श्रीरामहरि नाम के एक कायस्थ शिष्य पर उनकी सेवा का भार छोड़कर आप वृन्दावन चले आए। इनकी माता श्रीमती नारायणी श्रीमन्महाप्रभु के उच्छिष्ट प्रसाद को ग्रहण करती थीं। श्रीवृन्दावनदास जी श्रीमन्नित्यानन्द प्रभु के मन्त्र शिष्य थे। श्रीचैतन्य भागवत ग्रन्थ रत्न से इनकी श्रीनिताईचाँद के चरणों में भक्ति, निष्ठा स्पष्ट प्रदर्शित होती है। अद्भुत वर्णन किया है श्रीमन्महाप्रभु एवं श्रीमन्नित्यानन्द प्रभुपाद की समस्त लीलाओं का इन्होंने ।
इसलिए कहा गया है-
*भागवते कृष्णलीला वर्णिला वेदव्यास।*
*चैतन्यलीलाते व्यास-वृन्दावनदास ।।*
क्रमशः
श्रीगुरुगौरांगो जयते !!
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