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क्रम: 2⃣9⃣
🌺 शची गृह निमत्रण🌺
🌿अब अपने अपने पात्रों में से दोनों भोजन करने लगे और तीसरे पात्र में से वह दोनों अपने अपने लिए खींचातानी करने लगे। श्री गौरांग उसमें मुट्ठी भर कर अपने थाली में डालते । उधर निताई अपनी थाली में ।अनेक देर खींचातानी करते-करते श्री निताई चांद ने तीसरी थाली उठाकर सब द्रव्य अपने पात्र में ही डाल दिए। स्वप्न में जो खींचातानी हो रही थी लीला शक्ति ने उस रस का आस्वादन श्रीनिमाई निताई को प्रत्यक्ष रुप में करा दिया। शची माता इतने में दोबारा कुछ व्यंजन लेकर आए तो क्या देखती हैं दो 5 वर्ष के बालक बैठे हैं । श्री गौरांग का अति मनोहर श्याम वर्ण है और श्री निताई चांद का अति उज्जवल शुक्ल वर्ण ।
🌹 शची के आश्चर्य की सीमा नहीं रही जब उसने दोनों को दिगंबर ही देखा। उसने नेत्र बंद कर लिए पुनः जो खोलें तो दोनों ही चतुर्भुज मूर्ति थे । शंख, चक्र, गदा, पद्म तो गौर कृष्ण धारण कर रहे हैं और श्री निताई चांद हल और मूसल को। गौर कृष्ण के गले में कौस्तुभ मणि, वक्ष स्थल पर श्रीवत्स का चिन्ह और लक्ष्मी स्वरूपा स्वर्णरेखा के स्थान पर विष्णुप्रिया। शची माता कुछ ना समझ सकी। मूर्छित होकर जमीन पर गिर गई नेत्रों से जल धारा प्रवाहित होने लगी।
🌹 हाथ में जो भोजन आदि परोसने के लिए लाई थी वह सब गिर गया और कमरे में सब बिखर गया। माता शची को कुछ भी सुध बुध न रही।
अलौकिक ऐश्वर्य देखकर शची माता को सुध बुध न रहना कोई नई बात नहीं है । भगवद ऐश्वर्य का एक धर्म ही है। तैर्थिक ब्राह्मण ने दिगम्बर शिशु निमाई का जब पूर्ण ऐश्र्वर्य देखा था, वह मूर्छित हो गया था। हमारे श्री निताई चाँद श्री मनमहाप्रभु जी का षड्भुज रूप देखकर मूर्छित हो गए थे।
क्रमशः
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