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            क्रम: 3⃣0⃣

   🌺 शची गृह निमत्रण🌺

     🌿  यह तो सभी जानते ही हैं कि ब्रह्म मोहन लीला में श्री श्याम सुंदर के ऐश्वर्य को देख कर श्री ब्रह्मा जी भी मूर्छित हो गए थे। यह ऐश्वर्य तो माता शची के लिए अभूतपूर्व था और श्री निमाई निताई चांद के स्वरूप तत्वों का स्पष्ट प्रदर्शक था । शची माता ने पहले तो श्री गौर निताई को कृष्ण बलराम रूप में देखा कंस के कारागार में श्री कृष्ण का चतुर्भुज रूप तो माता देवकी ने भी देखा था परंतु श्री बलराम का चतुर्भुज रूप ब्रज में किसी ने कहीं नहीं देखा सुना।

           🌹यहां तो दोनों को शची माता ने चतुर्भुज रूप में देखा। फिर जन्म के समय भी श्री कृष्ण श्री राम कभी दिगंबर रूप में नहीं आविर्भूत होते, सदा पीतांबर धारी श्रीवत्स आदि सहित आविर्भूत होते हैं। यह एक अद्भुत बात देखी माता शची ने कि 5 वर्ष के बालक परंतु दिगंबर ।

      🌿    इस प्रकार एक ऐसे अद्भुत रूप को प्रकाशित किया। यहां प्रभु की ऐश्वर्य शक्ति ने जो कहीं भी किसी अवतार में प्रकाशित नहीं हुआ था जहां श्री गौर निताई चांद को श्री वृंदावन बिहारी श्री कृष्ण बलराम के रूप में श्री शची माता ने प्रत्यक्ष देखा , वहां ईश्वर शक्ति ने श्री हय शीर्ष पंचरात्र वर्णित चतुर्भुज श्री बलराम के भी दर्शन माता शची को करा दी दिए । वहां वर्णित है कि --
     तृतीयं तु यथा रामं चतुर्बाहु सृनुष्व  मे।
      
       🌹  श्री बलराम जी के विग्रह निर्माण एवं स्थापन के संबंध में हयशीर्ष पंचरात्र में इस प्रकार वर्णन मिलता है-
         वाम भाग के ऊपर वाले हाथ में लांगल( हल ) और निचले हाथ में मनोहर शंख, शक्ति के स्थान पर (दाएं भाग के ऊपर वाले हाथ में) गदा तथा निचले हाथ में चक्र के स्थान पर तलवार धारण करावे। इस प्रकार श्री बलराम मूर्ति प्रस्तुत कर जो व्यक्ति स्थापन करता है उसे पुत्र की प्राप्ति होती है और वह शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है।
 
     🌹    इस प्रकार श्री बलराम का भी चतुर्भुज रूप शास्त्रों में वर्णित है, जो निश्चय ही ब्रज बिहारी मूल संकर्षण श्री बलराम का अंश है। यह श्री बृज बिहारी मूल श्री बलराम ही श्री निताई चांद के रूप में आविर्भूत हुए हैं । ऐश्वर्य शक्ति ने उन चतुर्भुज रूप बलराम को श्री निताई चांद के एक अंश रूप आविर्भाव विशेष रूप में दिखाकर एक अभूतपूर्व ऐश्वर्य प्रदर्शित किया , जिसे देखकर शचि माता आनंद मूर्छित हो गई ।

         🌿श्री राम अवतार श्री कृष्णा अवतार में भी माता कौशल्या एवं माँ देवकी ने ऐसे चतुर्भुज रूप देखे थे परंतु इस प्रकार की आनंद मूर्छा का कहीं वर्णन नहीं मिलता।

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