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क्रम :4⃣1⃣

    *जगाई-मधाई उद्धार*

🌹पूरी कर दी श्रीनिताई चाँद ने अपनी प्रतिज्ञा। जगाई मधाई के दर्शन कर सब नदियावासी चमत्कृत हो उठे। श्रीगौरांग एवं जगाई, श्रीनिताई एवं मधाई जब भुजाएं उठाकर कृष्ण कीर्तन में नृत्य करने लगे तो पुलक, अश्रु, कम्प हो उठा दोनों भाइयों के शरीर मे और बार बार हुँकार कर पछाड़ें खानेलगे ये। पछाड़ें बड़ी विचित्र थीं-बिल्कुल पृथक थीं पहली पछाड़ों से। मूर्छित थे नशे में, परन्तु कुछ अनिर्वचनीय था यह नशा । प्रेम की पछाड़ें थी और नशा था कृष्णनाम का-दोनों ने श्रीनिताईचाँद की अदभुत स्तुति गान की-

*जय जय महाप्रभु जय विश्वम्भर।।*
*जय जय नित्यानन्द जय विश्वम्भर-धर।।*
*जय जय निजनाम-विनोद आचारज।*
*जय नित्यानन्द ! चैतन्य–सर्वकारज ।।।*
*जय जय श्रीजगन्नाथमिश्र-नन्दन।।*
*जय जय नित्यानन्द चैतन्य-शरण ।।*
*जय जय श्रीशचीपुत्र करुणासिन्धु।*
*जय जय नित्यानन्द श्रीचैतन्य-बन्धु ।।*
*जय जय रासज पण्डित दुहिता-प्राणेश्वर ।।*
*जय नित्यानन्द कृपामय कलेवर ।।*
*जय जय प्रभु साधक सब-काज।*
*जय नित्यानन्द वैष्णवाधिराज ।।।*

🌹इस प्रकार जगाई-नाधई ने श्रीगौरा-नितईचाँद की अनेक स्तुति की।अक्रोध परमानन्द श्रीनिताईचाँद को इस विचित्र करुणा ने पूर्व पूर्वावतारों के समस्त पापी-असुर-उद्धार को अतिअल्प कर डाला।नृसिंहावतार ,रामावतार से
कृष्णावतार में जितने-जितने असुरों का दुराचारी–पापियों का उद्धार ,सबका संहार करके मर जाने के बाद भले उन्होंने सिद्ध लोक को प्राप्त
किया ,परन्तु जीते --जी उन्होंने भगवत्कृपा का कुछ नहीं किया, उनके बन्धु-बांधवों ने, तथा जगत् में किसी ने भी उन असुरों के जीवन के परिवर्तन को नहीं देखा एवं भगवान द्वारा प्रदान की गई उनकी सदगति को भी किसी ने प्रत्यक्ष नहीं देखा। परन्तु अहो ! कलियुगपावनावतार श्रीश्रीगौर-निताईचाँद की कृपा से कल तक जो जगाई-मधाई अतिशय मद्यप गो -ब्राह्मण हिंसक परदारागामी, डाकू थे ,दुराचारी थे, आज वे परम साधु, उत्कृष्ट वैष्णव गंगा के समान पुनीत हो गये। उनका जीवन पलट गया। उन्होंने स्वयं ,उनके बन्धु-बान्धव ने भगवद्-कृपा का प्रत्यक्ष फल देखा। उन्होंने स्वयं उसके फल स्वरूप भगवत्-भजन का सुख प्राप्त कर भगवत परिकरत्व को प्राप्त किया।जय हो प्रेमदाता परम करुणामय निताईचाँद की, जिन्होंने अपना माथा
फुड़वाकर भी अधमों को सर्वोत्तम सद्गति प्रदान की।

    🌹श्रीगौराँग ने सब वैष्णवों से जगाई-मधाई पर अनुग्रह करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा-"ये जगाई-मधाई मेरे दास हैं, इस बात को मन से निकाल दो, सदा के लिए भूल जाओ की यह पापी, दुराचारी थे। मैंने इनके सब पाप ले लिए हैं। जैसी कृपा श्रीनिताईचाँद ने इन पर की है, किसी पर भी ऐसी कृपा किसी ने नहीं की।

🌹प्रभु ने कहा–यदि तुम्हें विश्वास न हो तो देखो मेरी देह को, इनके पापों से यह काली पड़ गई है। सबने देखा प्रभु की अंग–कान्ति गौर की बजाय श्याम हो गई थी। सब के सब आश्चर्य में पड़ गए। श्रीगौरांग सबको लेकर गंगा पर पहुँचे और आपने श्रीगंगा की महिमा प्रकट करते हुए-स्नान किया और समस्त श्यामता दूर हो गई। पूर्ववत् उज्ज्वल कान्ति से शोभित हो उठे। सबने जय-जयकार किया। सब अपने-अपने निवास स्थान पर चले गए। परन्तु श्रीजगाई–माधाई लौटकर अपने घर नहीं गए।गंगा के किनारे किसी खाट का सहारा लेकर आजीवन वहाँ ही रहे।

क्रमशः

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