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*श्रीनिताई चाँद*

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*शंका समाधान*

     अतः संन्यासाश्रम को त्यागकर स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण के अभिन्न-विग्रह
श्रीनिताईचाँद का गृहस्थाश्रम में प्रवेश करना कुछ भी दूषित नहीं, धर्म का उल्लंघन नहीं है।

    पूजनीय कवि कर्णपूर ने गौरगणोद्देश दीपिका में यह भी स्पष्ट वर्णन किया है कि श्रीवारुणी और श्रीरेवतीदेवी ही नवद्वीप लीला में श्रीवसुधा एवं श्रीजान्ह्वा के रूप में आकर आविर्भूत हुई थीं। श्रीगौरगणोद्देश दीपिका (६५-६६) में वर्णित है कि-

*श्रीवारुणी-रैवत वंश सम्भवे तस्य प्रिये हे वसुधा च जाहवी ।*
*श्रीसूर्यदासस्य महात्मनः सुते ककुदमरूपस्य च सूर्य तेजसः ।।*
*केचित् श्रीवसुधादेवी कलावपि विवृण्वते ।*
*अनंगमञ्जरी केचिज्जाहवीञ्च प्रचक्षते ।।*
*उभयन्तुसमीचीनं पूर्वन्यायात् सतां मतम् ।।*

   पहले वारुणी और रैवत वंश में उत्पन्न-रेवती श्रीबलदेव जी की दो पत्नियों थीं। अब वे दोनों सूर्य के समान तेजस्वी श्रीसूर्यदास की कन्या हुई जो वसुधा और जान्ह्वी नाम से श्रीनित्यानन्द प्रभु की पत्नियाँ हुई ,श्रीसूर्यदास पहले रेवती के पिता ककुदमी थे। कोई-कोई वसुधादेवी को अनंगमञ्जरी तथा कोई-कोई जाह्नवी कहते हैं साधुओं के मत में पूर्व न्याय से दोनों ही
'समीचीन हैं। अतः श्रीबलराम स्वरूप श्रीनिताईचाँद का निज नित्यकान्ताओं के साथ विवाह समीचीन ही था।

    इस विवाह-लीला का भी तो एक अत्यावश्यक प्रयोजन था। प्रभु वीरचन्द्र (वीरभद्र) जो श्रीनिताईचाँद के पुत्र रूप में आविर्भूत हुए, वे थे।संकर्षणव्यूह क्षीरसमुद्रशायी श्रीनारायण । श्रीमन्महाप्रभु तथा श्रीनिताईचाँद के अप्रकट होने के पश्चात उनके द्वारा प्रचारित प्रेम-भक्ति धर्म की रक्षा के लिए क्षीरसमदशायी नारायण का विशेष प्रयोजन था, क्योंकि वे ही धर्म संस्थापन के लिए अवतीर्ण हुआ करते हैं। अतः वे क्षीर समुद्रशायी श्रीनारायण ही श्रीबीरचन्द्र प्रभु के रूप में श्रीनिताईचाँद के आत्मज रूप में आविर्भूत हुए-क्षीरसमुद्रशा श्रीसंकर्षण का अंश हैं। इस बात को पहले कहा जा चुका है। अतः उनका आविर्भाव मूल संकर्षण तत्त्व श्रीनिताईचाँद के अंश से होना ही संगत था जो लौकिक लीला में गहस्थाश्रम–प्रवेश के बिना सम्भव न था। अतः प्रभु ने लीला को ग्रहण किया।

    श्रीकविराज कृष्णदास गोस्वामी ने श्रीनित्यानन्द-शाखा वर्णन प्रसंग में स्पष्ट लिखा है कि श्रीवीरचन्द्र गोस्वामी मूल स्कंध थे। ईश्वर होकर भी जो महाभागवत कहलाये।

क्रमशः

श्रीगुरुगौरांगो जयते !!

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