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*श्रीनिताई चाँद*

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*ईश्वरी श्री जान्ह्वा देवी*

   इसी प्रकार वृन्दावन को जाते समय रास्ते में ईश्वरी श्रीजानहवा जी ने एक महान् डाकू कुतबुद्दीन का भी उद्धार किया। अनेक यवनों को लेकर वह इन्हें लूटने के लिए आया। परन्तु सारी रात वह डाकू अपने साथियों सहित इधर-उधर भटकता रहा, ईश्वरी तक पहुँच ही नहीं सका। प्रातःकाल हो गया और सबके सब व्याकुल और भयभीत हो उठे। अन्त में ईश्वरी जानहवा जी की शरण में आकर वह डाकू आप-बीती निवेदन करने लगा—उसने कहा-“ईश्वरि !
मैं आपकी शरण हूँ। आप मेरी रक्षा करें | मैं सारी रात आपके चारों तरफ भ्रमण करता रहा हूँ, जहाँ जिधर जाता बड़े-बड़े सांप ही मुझे दीखते और मुझे काटने के लिए भागते थे। केवल हम लोगों के प्राण नहीं निकले परन्तु भय के मारे हम व्याकुल हो गये। फिर आकाश से ये शब्द हमारे कानों में पड़े कि तुम ईश्वरी के चरणों में जाकर निर्भयता प्राप्त करो और कोई तुम्हारी प्राण रक्षा का उपाय नहीं है। हे माता ! आप हम सबकी रक्षा करो।” ईश्वरी ने सबको अभय दान दिया और सबके सब कृष्णगुण गान करने लगे और सदा के लिए कृष्णभक्त बन गये ।

   इस प्रकार परम करुणामयी श्रीनिताई चाँद की आदि शक्ति ईश्वरी श्री जान्ह्वा देवी जी के असंख्य चरित हैं।जिन्होंने जाति-कुलादि का विचार छोड़कर सबको कृष्ण भक्ति प्रदायन कर कृतार्थ कर दिया।

    श्रीनिताई चाँद आदि -शक्ति ईश्वरी श्रीजान्ह्वा देवी की सदा ही जय हो जय हो जय हो !!

क्रमशः

श्रीगुरुगौरांगो जयते !!

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