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*श्रीनिताई चाँद*

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*प्रभुपाद गोस्वामी श्रीप्रेमानन्द जी*

*जय जय जय श्री प्रेमानन्द ।*
*आये गौड़देश तजि व्रज में, सेवन श्रीवृन्दावनचन्द ।।*
*जान्यो सार प्रेम भक्तिरस, जामें मान्यो परमानन्द ।*
*नवल विहार लाड़, सुखसेवा, "ललितलडैती' रसिक अलिन्द ।।*

   प्रभुपाद श्रीवीरभद्र गोस्वामी वंशोद्भव शृंगारवटस्थ श्रीगोस्वामीवृन्द का जीवनवृत्त अनुसन्धानीय है। अनेक विभूतियाँ आविर्भूत हुई जिन्होंने श्रीनिताईचाँद की अपूर्व कृपा प्राप्त कर असंख्य जीवों को श्रीगौरचन्द्र प्रतिपादित विशुद्ध भक्ति पथ का पथिक बनाकर उनका उद्धार कर दिया। सर्व प्रभुपाद श्रीनियमानन्द, पूर्णानन्द, सदानन्द, गो० श्रीप्रेमानन्द आदिकों, में एक दो के जीवन वृत्त कहीं-कहीं प्राप्त हुए हैं।

     श्रीनियमानन्द प्रभुपाद की गुण महिमा से प्रभावित होकर राजा ने चौमुहाँ
अकबरपुर तक के गाँवों की जमींदारी प्रदान कर दी।औरंगजेब ने सर्वत्र हिन्दुओं पर अत्याचार किए, मन्दिर गिराये, किन्तु श्रीपूर्णानन्द गोस्वामी पाद को औरंगजेब ने ही यमुना पार सकराया जहाँगीरपुर आदि ग्राम प्रदान किये-जो केवल इनके महद्गुणों का कारण था ।गोस्वामी श्रीप्रेमानन्द प्रभुपाद तो यथानाम तथागुण हर समय श्रीनिताई-निमाई पद-प्रेमानन्द में मग्न रहते थे। दीनता की मूर्ति थे--पृथ्वी में गढ्ढा खोद कर उसमें आसन लगाकर भजन करते थे, अपनी चरणरज किसी को न देते। कोई भी वैष्णव उनके दर्शनों को आता तो आप स्वयं गढ्ढे में उठ मानों की रज को ले लेते । दर्शक को उनके चरणा की रज का स्पर्श किसी प्रकार सम्भव न हो पाता।

    एक कुम्भ के अवसर पर समस्त साधु समाज को शृंगारवट में गोस्वामीपाद
की ओर से निमन्त्रण दिया गया। यह नियम था कि प्रभुपाद श्रीनिताईचाँद वंश के द्वारा सबसे पहले झरा रसोई के आयोजन के बाद फिर कोई अखाड़ा या आश्रमाध्यक्ष महन्त कुम्भ में आने वाले साधु समाज को अपने यहाँ निमन्त्रित करता था। असंख्य साधु आये और मालपुआ और आलू के साग का प्रसाद परोसा जाने लगा। दस बजे सवेरे से सन्ध्या तक पंगत चलती रही।भण्डार में घी समाप्त हो गया। बड़ी संख्या में वैरागी साधु समाज बैठा है और पुआ निकलें तो कैसे ? श्रीगोस्वामी जी के कान में सेवकों ने निवेदन किया।आप बोले श्रीयमुना जी से उधार ले लो, कहीं जाने का समय नहीं यमुनाजल
से टीन गिन-गिन कर ले जाकर कढ़ाई में डाले जाने लगे और पुआ उसमें तले जाने लगे। समस्त पंगत बिना किसी विलम्ब के जिमा दी गई।

क्रमशः

श्रीगुरुगौरांगो जयते !!

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