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*श्रीनिताई चाँद*

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*पण्डित श्रीसूर्यदास एवं श्रीकृष्णदास*

    पण्डित श्रीसूर्यदास की उपाधि थी ‘सरखेल' । अतः यह ‘श्रीसूर्यदास सरखेल' नाम से प्रसिद्ध थे। श्रीनित्यानन्द प्रभु की शाखा के हैं एवं उनके ससुर भी। श्रीश्रीनित्यानन्द प्रभु की पत्नी श्रीवसुधा एवं जानहवा माता के यह पिता थे।शालिग्राम में यह बास करते थे, फिर अम्बिका कालना में आकर बस गये थे। इनका श्रीमन्नित्यानन्द प्रभु के प्रति इतना दृढ़ विश्वास एवं प्रेम था
कि इन्होंने यह जानते हुए भी कि श्रीनित्यानन्द प्रभु अवधूत हैं, उनको अपनी दोनों कन्याएँ समर्पित कर दीं।।
पूर्वलीला में ये ककुदमी थे। इनकी पत्नी का नाम था भद्रावती ।।

*श्रीवारूणीरैवतवंशसम्भवे तस्य प्रिये द्वे वसुधा च जाह्नवी।।*
*श्रीसूर्यदासस्य महात्मनः सुते ककुदमरूपस्य च सूर्यतेजसः ।।*

   इन्होंने भोग ‘निर्णय पद्धति' की रचना की। श्रीकृष्णदास श्रीसूर्यदास के छोटे भाई थे। इनका विशुद्ध प्रेम था प्रभुपाद श्रीनित्यानन्द के चरणों में।।श्रीवसुधा-जानहवा के विवाह समय इन्होंने विवाह का समस्त आयोजन किया था। ये दोनों भाई ही श्रीमन्नित्यानन्द प्रभु की कृपा से कृष्णप्रेम के भण्डार थे।

क्रमशः

श्रीगुरुगौरांगो जयते !!

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