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*श्रीनिताई चाँद*
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*श्रीसदाशिव कविराज*
ये कंसारिसैन के पुत्र थे। इन्होंने 'शचीनन्दन-विलक्षण चतुर्दशक की रचना की। पूर्व लीला में ये चन्द्रावली थे।
*पुरा चन्द्रावली यासीद् ब्रजे कृष्ण प्रिया परा।*
*अधुना गौड़ देशे सा कविराज सदाशिवः ।।*
गौ० ग० १५६
*श्रीपुरुषोत्तमदास*
यह श्रीसदाशिव कविराज के पुत्र थे। आजन्म श्रीनित्यानन्द के चरणों में
प्रेमवान थे और निरन्तर श्रीकृष्ण के साथ बाल्यलीला का आस्वादन करते थे।पूर्व लीला में स्तोक कृष्ण थे।
*स्तोक कृष्णः सखा प्राज्ञो दासः श्रीपुरुषोत्तम।।*
(गौ० ग० १३०)
*श्रीकानु ठाकुर*
यह श्रीपुरुषोत्तदास के पुत्र थे। यह अभी बारह दिन के ही थे कि इनकी माता का स्वर्गवास हो गया। इनकी माता का नाम जानहवादेवी था, वह ईश्वरी श्रीजानहवादेवी की सहेली थी। जानहवादेवी के मर जाने के बाद श्रीकानु ठाकुर का लालन-पालन ईश्वरी माँ जानहवादेवी ने किया। इसी कारण इनमें अगाध कृष्ण-प्रेम का आविर्भाव हुआ।
*श्रीउद्धारण दत्त*
द्वादश गोपालों में एक हैं। पूर्वलीला में ये थे सुबाहु गोपाल । श्रीकरदत्त इनके पिता और भद्रावती इनकी माता थी। ये श्रीनित्यानन्द प्रभु के पार्षद थे।विपुल ऐश्वर्य पुत्र-कलना को त्याग कर ये श्रीनिताईचाँद के साथ ही उनकी सेवा के लिए सदा विचरण करते रहते थे। प्रभुपाद की रन्धन-सेवा भी किया करते। इन्होंने उद्धारणपुर ग्राम बसाया और वहाँ श्रीनिताई-गौरांग के श्रीविग्रह प्रतिष्ठित किए जो अभी तक विराजमान हैं-सेवित हैं।
क्रमशः
श्रीगुरुगौरांगो जयते !!
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