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*श्रीनिताईचाँद*

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*श्रीवैष्णवानन्द आचार्य*

कष्ण भक्ति के पूर्व अधिकारी थे ये। इनका पूर्वनाम रघुनाथपुरी था माँ जानहवा की सेवा में निमग्न रहते थे।

*श्रीविष्णुदास, श्रीनन्दन, एवं श्रीगंगादास*

  ये तीनों भाई थे, जिनकी श्रीनिताईचाँद के चरणों में अतुलनीय प्रीति थी।श्रीनिताई चरण जब नदिया पधारे तो सर्व प्रथम इनके घर में ही निवास किया था।

*श्रीपरमानन्द उपाध्याय*

   प्रभुपाद श्रीमन्नित्यानन्द के चरणों में अगाध प्रेम था इनका। उनकी सेवा में तत्पर रहते थे।

    *श्रीजीव पण्डित*

श्रीरत्नगर्भ आचार्य के पुत्र थे ये। पूर्वलीला में ये इन्दिरा थे।

*माथली माधवाचार्य इन्दिरा जीव पण्डितः ।।।*

(गौ० ग० १६६)

     महाभाग्यवान थे ये और श्रीमन्नित्यानन्द प्रभु का लीला-गुणगान इनका जीवन व्रत था। श्रीप्रभुपाद इनके घर में कृष्ण-संकीर्तन महोत्सव कर अति आनन्द लाभ करते थे।

  *श्रीपरमानन्द गुप्त*

  श्रीमन्नित्यानन्द प्रभु ने पहले कुछ दिन इनके घर वास किया था।पूर्वलीला में ये थे मन्जुमेधा।

*मालती चन्द्रलतिका मजुमेधा वरांगदा।*
*शुभानन्दो द्विजो ब्रह्मचारी श्रीनामकः ।।*
*परमानन्द गुप्तो यत्कृता कृष्ण स्तवावली।*

(गौ० ग० १६४/१६६)

*मालती, चन्द्र लतिका एवं मन्जुमेधा*

   जो श्रीराधिका जी की निज सेविकाएँ थीं वे गौड़ लीला में क्रमशःशुभानन्द विप्र, ब्रह्मचारी श्रीधर तथा श्रीपरमानन्द गुप्त हुए।कृष्ण स्तवावली एवं गौरांग विजय
इनकी रचनाएँ हैं। कृष्ण भक्ति के भण्डार थे अति निष्ठावान थे।

*श्रीनारायण, श्रीकृष्णदास, मनोहर एवं देवानन्द*

     ये चार भाई थे जो श्रीनिताईचाँद के चरण सेवक थे। श्रीनारायण एक कुशल वैद्य भी थे।

क्रमशः

श्रीगुरुगौरांगो जयते !!

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